

भंडारा. गोसीखुर्द बांध प्रशासन ने घोषणा की थी 15 दिसंबर को वह 245.50 मीटर के स्तर पर पानी रोकेगी. इससे संभावना जताई जा रही थी कि पानी रोकने के 12 घंटे के अंतराल से भंडारा शहर से सट कर बहती वैनगंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि होगी एवं नदी पर बना अंग्रेज कालीन पुल भी डूब सकता है.
लेकिन समाचार लिखे जाने तक वैनगंगा नदी का पानी पुल को छूकर ही बह रहा था. लोग बेफिक्री से पुल से आवाजाही कर रहे थे. उधर नदी एवं गोसीखुर्द में जलस्तर के ताजे आंकड़े के बारे में जिला प्रशासन बेफिक्र था. उन्होने कह कर जिम्मेदारी टाल दी कि गोसीखुर्द बांध प्रशासन से कोई आंकड़ा नहीं मिले.
नदी में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पूर्व तैयारी बेहद आवश्यक थी. 245.50 मीटर के जलस्तर पर न सिर्फ भंडारा शहर का पुराना पुल डूबने की बात कही गयी थी. साथ ही नदी से सटे गांव, कस्बे, शहर के परिसर में पानी घुसने की आशंका थी. बुधवार को शाम के समय पुल से जिस तरह से लोग, पैदल, साइकिल एवं मोटरसाइकिल से गुजर रहे थे. उन्हे रोकने के लिए जिला प्रशासन या पुलिस विभाग को कोई कर्मचारी नहीं था.
गोसीखुर्द बांध परियोजना यह विदर्भ में सबसे बड़ी है. इस बांध मे 245.50 मीटर के जलस्तर पर पानी को रोकना यह भी ऐतिहासिक पल था. लेकिन जिला प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को नहीं समझा. लोगों को उनके हाल पर छोड दिया. कुछ इसी तरह गोसीखुर्द बांध प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के फोन नेटवर्क एरिया के बाहर बताए जा रहे थे.
सुबह 11 बजे वैनगंगा नदी पर बने पुराने पुल के पास में 245.06 मीटर जलस्तर रिकॉर्ड किया गया. जिसका फोटो आपदा विभाग ने रात्रि 8.11 बजे प्रेस के साथ साझा किया. इसके अनुसार 245.50 मीटर तक पहुंचने के लिए 1.44 फुट पानी शेष था. लेकिन शाम में क्या स्थिति थी? इसका संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हो सका.